Hardware Shop Me Udhar System Kaise Manage Kare (Credit Control Guide 2026)

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Hardware Shop Me Udhar System Kaise Manage Kare (Credit Control Guide 2026)



अगर आप हार्डवेयर की दुकान चला रहे हैं, तो Credit System यानी उधार का सिस्टम आपके बिजनेस का बहुत बड़ा हिस्सा होता है।

आप हार्डवेयर बिजनेस में कैश या स्पॉट पेमेंट का काम भी कर सकते है लेकिन बिजनेस को बड़ा बनाने के लिए बल्क सेल जरूरी होता है और ये क्रेडिट सिस्टम में ही हो सकता है । हैवी सेल हैवी प्रॉफिट और ग्रोथ। हालांकि उधार देने पर पेमेंट का रिस्क हमेशा होता ही है बस उसे सही तरीके से मैनेज करना होता है ।

हार्डवेयर बिजनेस में ज्यादातर काम cash में नहीं बल्कि credit पर चलता है। खासकर उन ग्राहकों से जिनका काम अलग अलग साईट पर रेगुलर चलता ही रहता हैं जैसे Builders, Architects, Contractors आदि ।

वही वर्किंग क्लास कैटेगरी में भी क्रेडिट पर ही काम होता है पर यहां थोड़ा कम क्रेडिट होता है जैसे कभी कभी या कुछ खास समय तक और इसमें सारे ग्राहक Carpenters, Plumbers, Electricians और Mechanic आदि होते है और इन्हीं से काम होता है ।

काम भले ही कम हो लेकिन इस कैटेगरी के ग्राहक आप की दुकान से हमेशा माल लेते रहते है यही आप के रेगुलर सेल का बेस बनती है हर नए बिज़नेस के लिए शुरुआत में संजीवनी होती है यह ग्राहक कैटेगरी।

अगर आपने उधार को सही तरीके से manage नहीं किया, तो profit होने के बाद भी cash flow की problem आ सकती है। आप के बिजनेस में सेल भी होगा, प्रॉफिट भी होगा पर रोटेशन जाम सा हो जाता है

इस पोस्ट में हम समझेंगे कि Hardware Shop में Credit System कैसे काम करता है, उधार कैसे दिया जाता है और उसे सही तरीके से कैसे manage किया जाता है जिससे कि आप का बिज़नेस सही तरीके से प्रॉफिट कमा सके और आप की ग्रोथ होती रहे ।


Hardware Shop में Credit System क्यों जरूरी है



हार्डवेयर बिजनेस में ज्यादातर customers site work करते हैं। कुछ साइट्स पर जल्दी तो कुछ साइट्स पर slow पेमेंट सिस्टम काम करता है क्योंकि सालों तक प्रोजेक्ट चलते रहते है

तो जैसे जैसे और जितना काम होता जाता है उतना ही पेमेंट क्लाइंट उन्हें देता जाता है और इसी वजह से किसी भी साइट का पूरा पेमेंट या एडवांस पेमेंट सिस्टम लगभग नहीं होता है 

कही न कही क्लाइंट को भी एक छोटा सा डाउट रहता ही है कि पूरा पेमेंट कर दूं और काम अधूरा ही रहा तो
बस इसी वजह से पेमेंट सिस्टम थोड़ा स्लो काम करता हैं क्योंकि रियल मार्केट में भी ऐसे कई उदाहरण है जैसे

  • कॉन्ट्रैक्टर का साइट पूरी होने से पहले की काम अधूरा छोड़ देना।
  • कॉन्ट्रैक्टर को स्टाफ या पेमेंट समय पर न मिलने पर काम छोड़ देना ।
  • समय पर क्लाइंट द्वारा माल लाकर नहीं देना। 
  • कई बार क्लाइंट भी साइट पूरी होते ही बिना पूरा पेमैंट किए कॉन्ट्रैक्ट, कारपेंटर आदि को रवाना कर देते है 

ऐसी बाते भी रियल मार्केट में होती है इसलिए क्लाइंट और बिल्डर,आर्किटेक्ट, कॉन्ट्रैक्टर, कारपेंटर, प्लंबर्स इलेक्ट्रीशियन आदि सभी अपने अपने अनुभव से अच्छे ग्राहक के साथ ज़्यादा काम करना पसंद करते है ।

हालांकि इसमें किसी को भी गलत कहना सही नहीं होगा क्यों कि हर एक की वास्तविकता अलग अलग होती है कही पर क्लाइंट तो कही पर क्लाइंट का काम लेने वाला इसके लिए जिम्मेदार होता है या काफी सारे दूसरे कारण भी हो सकते है जैसे स्टाफ,पेमेंट,साइट में लगने वाला टाइम आदि ।

इन सारी चीजें के कारण क्लाइंट और काम को करने वाले दोनों सचेत रहकर स्टेप बाय स्टेप काम करते है 

जैसे दोनों मिल कर प्रोजेक्ट विजिट कर के प्रोजेक्ट में होने वाले खर्च का एस्टीमेट निकालते हैं ताकि बजटिंग की जा सके, क्लाइंट भी अलग अलग कांट्रेक्टरों से एक ही प्रोजेक्ट के अलग अलग एस्टीमेट लेते है ताकि जिसका काम कम खर्च में समय पर और अच्छा हो उसे प्रोजेक्ट दिया जाए ।

अब जब प्रोजेक्ट देना होता है तो उससे पहले ही फाइनल कर लिया जाता है कि कॉन्ट्रैक्ट माल के साथ देना है या क्लाइंट माल लाएगा ।

Contract With Goods


अगर काम माल के साथ है तो फिर काम को लेने वाला कॉन्ट्रैक्टर और क्लाइंट दोनों आपसी सहमति से मिल के डिसाइड करते है कि प्रोजेक्ट में किस क्वालिटी का कहा कहा कितना माल लगेगा उसी के अनुसार बजटिंग होती है ।
 
फिर कॉन्ट्रैक्टर अपनी टीम में से कारीगर, माल, लेबर आदि सभी चीजों की व्यवस्था करता है ताकि जल्दी से जल्दी काम चालू हो सके और क्लाइंट थोड़ा थोड़ा पेमैंट देता जाता है जिसे कि काम के लिए जरूरी स्टॉक, सैलरी आदि कॉन्ट्रैक्टर दे सके अपनी टीम को 
इसमें माल कॉन्ट्रेक्ट लेने वाला लाता हैं। 

Contract Without Goods


अगर माल क्लाइंट लाकर देता है तो कॉन्ट्रैक्ट में लेबर चार्जेस और काम की शर्ते ही होती है जो क्लाइंट और काम लेने वाला कॉन्ट्रैक्टर मिल के तय करते है जैसे -
  • काम कैसा करना है ।
  • कितने समय तक पुरा करना हैं ।
  • काम को पूरा कर के देने तक कितने पैसे लगेंगे ।
  • क्लाइंट कब कब और कितना पेमेंट देगा ।
  • क्लाइंट माल कब लाकर दे सकता है ।
  • साइट की जरूरी बातें जैसे माल ले जाने के लिए लिफ्ट का उपयोग किया जा सकता है या नही ।

इसमें क्लाइंट को माल अपनी पसंद का लेकिन तय शर्तों के अनुसार समय पर अरेंज करके देना होता है ।


अब इस पूरे सिनेरियो में दोनों तरफ से दोनों को क्लाइंट और कॉन्ट्रैक्ट लेने वाले को काम और पेमेंट से जुड़े डाउट्स हमेशा रहते ही है जब तक काम पूरा फाइनल न हो जाए । यानि कि पेमेंट स्टक हो जाने का डर होता है 

इसी लिए फाइनल हो चुके प्रोजेक्ट अमाउंट में से क्लाइंट जितना काम होता जाता है उतना ही पेमेंट धीरे धीरे करता जाता है और कॉन्ट्रैक्टर भी जितना पेमेंट मिलता जाता है उतना ही काम करता जाता है ।
इसमें कोई भी गलत नहीं है सभी अपनी अपनी जगह सही है ।

यही से इस सिस्टम में क्रेडिट सिस्टम यानि कि उधारी के व्यापार की एंट्री होती है 

अब जब पेमेंट धीरे धीरे आएगा तो माल भी धीरे धीरे ही खरीदा जाएगा । तो प्रोजेक्ट लेने वाला आगे हार्डवेयर की दुकान से माल भी थोड़ा थोड़ा लेकिन रेगुलर लेता जाता है क्यों कि प्रोजेक्ट तो सालों चलते है और हर कॉन्ट्रैक्टर कई सारे प्रोजेक्स पर काम कर रहा होता है 

उनका payment cycle ऐसा होता है कि उन्हें अपने client से payment बाद में मिलता है।
इसलिए वो retailer से उधार में सामान लेते हैं और बाद में payment करते हैं।

अगर आप credit नहीं देते, तो ऐसे customers दूसरी दुकान पर चले जाते हैं। इसलिए limited और controlled credit देना जरूरी होता है।

तो थोड़ा थोड़ा लेकिन कई साइट्स पर लगातार माल जाता है जिससे कि रेगुलर बल्क सेल मिलती है ।

अब अगर आप इन कॉन्ट्रैक्ट लेने वाले आपके ग्राहकों कॉन्ट्रैक्टर,बिल्डर्स,आर्किटेक्ट आदि को अपने बजट और रिस्क लेने की लिटमिस में उधार दे सकते हो तो आप बल्क सेल कर सकते हो ।

यानि कि रेगुलर काउंटर पर लिमिटेड सेल कैश में या
बल्क सेल क्लीयर पेमेंट लिमिट्स में उधार देकर ।

अब तक हमने समझा कि हार्डवेयर बिजनी में उधार या क्रेडिट सिस्टम क्यों जरूरी होता है और कैसे काम करता है ।

अब समझते है कि इसे सही से मैनेज करना क्यों जरूरी होता है । हार्डवेयर बिजनेस में सिर्फ क्रेडिट देकर ज्यादा क्वांटिटी में माल बेच देना ही सफलता नहीं होती

बल्कि रियल स्किल्स होती हैं उस बेचे हुए माल का पेमेंट सही समय पर और पूरा लाना फिर उसे रेगुलर रोटेशन में रि-इन्वेस्ट करना ताकि आप आगे भी व्यापारियों को समय पर पेमेंट कर सके

जिससे कि आप को भी समय पर सही प्रोडक्ट्स और सर्विसेज मिलती रहे तभी एक सफल और प्रॉफिटेबल बिज़नेस बनता है ।


Hardware Business में क्रेडिट सिस्टम कैसे मैनेज किया जाता है।


हमने ऊपर जाना कि क्रेडिट या उधार क्यों देना चाहिए अब हर ग्राहक कैटेगरी में क्रेडिट देने की लिमिट्स होना बहुत जरूरी होता हैं बिना लिमिट के दिया गया उधार बिजनेस के लिए बड़े लॉस या मुश्किलें बढ़ा सकता है तो उधार हमेशा सोच समझकर ही दे ।

किसको उधार देना चाहिए



Regular Customer 
हर customer को उधार देना सही नहीं होता।
उधार देने से पहले यह समझना जरूरी है कि customer कौन है और उसका background फील्ड क्या है। Regular customers जिनकी payment history अच्छी है उन्हें credit दिया जा सकता है।

New Customer
नए कस्टमर्स के साथ जितना हो सके स्पॉट पेमेंट या कम से कम उधारी में काम करने की कोशिश करे । 
क्यों कि शुरुआत से ही हर नए ग्राहक को फास्ट पेमेंट सिस्टम में रखें ताकि स्लो पेमेंट ग्राहक कम हो और पेमेंट सर्किल सही से चलता रहे ।

दोनों तरह के ग्राहकों में से अच्छी पेमैंट हिस्ट्री वाले ग्राहकों की एक अलग लिस्ट बनाए फिर कोशिश करे कि फास्ट पेमेंट सिस्टम वाले ग्राहकों को आप जल्दी और बेहतरीन सर्विसेस प्रोवाइड करवाए जिससे कि वो भी अपने अच्छे अनुभव के कारण आप से ही ज्यादा माल खरीदते रहे ।

Invested Business Capital से उधार देने की लिमिट्स तय करना -


बिल्डर्स, आर्किटेक्ट और कॉन्ट्रैक्टर को उधार देना भी जरूरी है ताकि दोनों का काम सही से चलता रहे लेकिन इनकी माल की खपत ज्यादा होती है तो अपने

इन्वेस्टेड बिज़नेस कैपिटल
मार्केट में आप को मिल सकने वाली उधारी
और व्यापारियों से आप के कॉन्टैक्ट्स कैसे है

उसी के आधार पर फाइनल उधार देने की लिमिट का एस्टीमेट निकाले ताकि आप अपना गेम बजट में ही खेले

Invested Business Capital Estimate 

यह एस्टीमेट कैसे निकले आइए एक उदाहरण से जानते है 
जैसे आप ने बिज़नेस में कैपिटल लगाया है कुल 20 लाख रुपए, जिसमें से आप के बिजनेस सेटअप में 5 लाख रुपए खर्च हुए,बाकी 15 लाख रुपए का बिजनेस में स्टॉक परचेज हुआ और अभी आप के मार्केट कॉन्टैक्ट्स अच्छे है जिससे कि आप और 5 लाख का माल व्यापारियों से उधार ले सकते है लाइबिलिटी के साथ तो आप का अवेलेबल इन्वेस्टेड कैपिटल हो गया  

15 लाख का स्टॉक + 5 लाख की व्यापारियों से मिलने वाली उधारी (बिजनेस सेटअप के 5 लाख खर्च को छोड़ कर) टोटल हो गए 20 लाख रुपए  ।

अब आप क्रेडिट कितना दे सकते हैं वह इस अमाउंट का 30 से 40% ही होना चाहिए इससे ज्यादा नहीं ।
अब आप के दुकान की उधार देने की लिमिट हो जाएगी 20 लाख रुपए का 40% यानिकि 8 लाख रुपए ।
और ये अधिकतम लिमिट है इसे और नहीं बढ़ाना है ।

क्योंकि आप की दुकान में हमेशा माल भी अवेलेबल होना चाहिए ताकि आप हर कस्टमर को सही समय पर माल देकर अपना रेगुलर बिजनेस रन कर सके ।
दूसरी और आपने पहले ही ₹5 लाख का माल उधार ले रखा है जिसका पेमेंट आपको व्यापारी को समय पर करना भी है तभी बदले में दूसरा माल आता जाएगा

इस रिलेशन को भी सही ढंग से मेंटेन करना है जैसे ही रिलेशन में थोड़ी सी भी कमी आती है तो सीधा-सीधा मिलने वाली उधारी और माल में भी कमी आती है तो इसको बनाए रखना बहुत ज्यादा जरूरी होता है ।
यह रिलेशन आगे जाके आप को आप के इन्वेस्टेड कैपिटल से भी ज्यादा उधारी मिलने का पावर देता है जिसके मल्टिपल फायदे बिजनेस में आगे जाके आप को होते है ।

इसीलिए आप इतना ही उधार मार्केट में दे जिससे कि आपका रेगुलर बिजनेस रोटेशन डिस्टर्ब ना हो और बिजनेस बिना प्रॉब्लम के रेगुलर चलता रहे ।

आगे भविष्य में जैसे-जैसे आपका प्रॉफिट री इन्वेस्ट होता जाता है व्यापार में ही, वैसे-वैसे यह आपकी कैपेसिटी बढाता जाता है और उसी से आपका कैपिटल और आपका अवेलेबल इन्वेस्टेड कैपिटल भी बढ़ता जाता है ।

आप आगे उधार भी ज्यादा दे सकते हैं साथ ही व्यापारियों को भी आप जल्दी पेमेंट कर पाते जिससे आप की मार्केट में रेपुटेशन बड़ी है हर व्यापारी आप को माल देना चाहेगा।

लेकिन इसका बैलेंस मेंटेन करके चलना बहुत ज्यादा जरूरी होता है क्योंकि ना चाहते हुए भी अगर कहीं उधारी का पेमेंट फस जाता है या उसे आने में समय ज्यादा लग जाता है तो आपका रोटेशन बैकग्राउंड में चलते रहना चाहिए अगर किसी कारण से रोटेशन में दिक्कत आ रही है तो तुरंत आपकी कंपटीशन मार्केट में वैल्यू डाउन होने चालू हो जाती है क्योंकि

  • आपके पास या तो माल सही नहीं होगा
  • अगर माल है तो व्यापारी को देने के लिए कैश फ्लो हाथ में नहीं होगा और अगर दोनों है
  • तो आगे ग्राहक को देने के लिए उधारी नहीं होगी 

क्योंकि आप ऑलरेडी उधार दे चुके होंगे तो जब तक वहां से पेमेंट आएगा नहीं तब तक आप आगे पेमेंट कर नहीं पाते और यह सिचुएशन जब बढ़ती जाती है तब ही बिजनेस में लॉसेस होने लगते हैं

Contractors, carpenters और plumbers जैसे working customers को limited credit दिया जा सकता है क्योंकि उनका काम चलता रहता है।

नए या unknown customer को सीधे उधार देना risk होता है। शुरुआत में cash पर काम करें और धीरे-धीरे trust बनने पर credit शुरू करें।


उधार कितना देना चाहिए



उधार देने की एक limit fix होना बहुत जरूरी है।
हर customer के लिए एक maximum limit तय करें जैसे 5000, 10000 या 20000।

यह limit आपकी shop के size, capital और customer की reliability पर depend करती है।
एक ही customer को unlimited credit देना future में problem create कर सकता है।

  • नए ग्राहक से स्पॉट पेमेंट में ही डील करे ।
  • कॉन्ट्रैक्टर को आप 10 - 50 हजार तक 
  • बिल्डर्स को आप 1-3 लाख के बीच में ।
  • आर्किटेक्ट्स को 1-2 लाख के बीच में 

एवं कारपेंटर प्लंबर्स इलेक्ट्रीशियन आदि को आप 20 हजार तक की क्रेडिट टाइम लिमिट तय कर के दे सकते है फिर आगे जिसका जितना अच्छा और फास्ट पेमेंट उसे उतनी ही अच्छी और फास्ट सर्विस देनी है उसी के साथ ज़्यादा काम भी करना हैं। 

Payment Cycle कैसे manage करें


हर प्रकार के ग्राहक को उधार देते वक्त ही वो पेमेंट कैसे करेंगे इसकी टर्म्स डिसाइड करे जैसे कॉन्टैक्ट्स डिटेल्स, पेमेंट मैथड्स, पेमेंट टाइमिंग आदि की जानकारी ग्राहक से जरूर लेवे Credit देने के साथ-साथ payment लेने का system clear होना चाहिए।

कुछ customers weekly payment करते हैं, कुछ 15 दिन में और कुछ monthly।

  • आपको पहले ही clear कर देना चाहिए कि payment कब करना है। अगर payment time पर नहीं आता, तो politely follow-up करना जरूरी होता है।
  • अगर ज्यादा लेट होता है तय शर्तों के बाद भी तो आप ग्राहक को फोन करके बात कर सकते है या 
  • फिर जरूरत पड़े तो स्टॉक या सर्विसेज में थोड़ी कमी कर के भी थोड़ा प्रेशर क्रिएट कर सकते है ।
  • आगे आप लीगल सॉल्यूशंस भी ट्राई कर सकते है क्यों कि रियल मार्केट में ऐसा भी होता है ।


Record Maintain करना


बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए बल्क सेल करना बहुत जरूरी है क्योंकि मार्केट में आने से ज्यादा जरूरी है कि मार्केट में बने रहना क्यों कि मार्केट में आप अकेले ही नहीं हो । इसलिए उधार का सबसे important part है record maintain करना। अगर record clear नहीं है तो confusion और loss दोनों हो सकते हैं।

आप notebook में लिख सकते हैं या accounting software use कर सकते हैं।

हर entry clear होनी चाहिए:
  • किसने कितना सामान लिया
  • कितने का bill बना
  • कितना payment आया
  • कितना बाकी है
Clear record होने से future में कोई dispute नहीं होता।

Cash Flow का ध्यान रखें

Profit और cash flow दोनों अलग चीजें हैं।
कई बार दुकान profit में होती है लेकिन cash नहीं होता क्योंकि पैसा उधार में फंसा होता है और इस से दुकान के रेगुलर ऑपरेशंस में दिक्कत आने लगती है 

इसलिए हमेशा ध्यान रखें कि जितना उधार दे रहे हैं उससे ज्यादा cash flow disturb ना हो।
Balance maintain करना बहुत जरूरी है।


Late Payment को कैसे handle करें


कई बार customer payment delay करता है।
ऐसे में गुस्सा या लड़ाई करने से relation खराब होता है सही तरीका है:

politely remind करना
regular follow-up करना
जरूरत पड़े तो supply temporarily रोक देना
थोड़ा थोड़ा कर के पेमेंट लेते जाए जितना पैसा आएगा उतना ही रोटेशन रेगुलर बना रहेगा ।
एक स्लो पेमेट वाले ग्राहक के स्थान पर दो नए और अच्छे ग्राहक बनाए 
ग्राहक की समस्या को भी समझे हो सकता है कही कोई समस्या हो 
माल से जुड़ी कोई समस्या हो तो तुंरत ठीक करने में ध्यान दे जैसे वारंटी, खराब या डैमेज प्रोडक्ट इश्यू।
स्टाफ या किसी के व्यवहार का प्रॉब्लम 
किसी प्रोडक्ट को लेकर ग्राहक को कन्फ्यूजन हो तो भी जितना जल्दी हो सके निवारण करे ।

इससे customer भी समझता है और payment भी जल्दी आता है ।


Bad Debt से कैसे बचें


बिजनेस में हर तरह के ग्राहक होते है कुछ सही तरीके से काम करना पसंद करते है तो कुछ ऐसे भी होते है जो माल उधार लेकर लगभग गायब ही हो जाते है ।
ऐसे ग्राहकों का मतलब सीधा लॉस ही होता है यानी Bad debt मतलब ऐसा पैसा जो वापस नहीं आता।
इससे बचने के लिए:

unknown customer को उधार ना दें
limit के अंदर credit दें
payment history check करें
चेन सिस्टम में काम करे ।
अच्छे ग्राहकों से ही काम करे भले ही काम कम हो ।
और सबसे जरूरी: “जितना risk उठा सकते हो उतना ही उधार दो”


Real Experience (IMPORTANT)



Real market में देखा जाए तो उधार देना मजबूरी भी है और opportunity भी।

अगर सही customer को सही limit में credit दिया जाए तो वही customer आपकी regular sale बन जाता है।

लेकिन अगर बिना सोचे-समझे उधार दिया जाए तो वही पैसा फंस जाता है और business slow हो जाता है।

कई दुकानदार profit में होते हुए भी cash flow की problem की वजह से struggle करते हैं और इसका main reason गलत credit management होता है।

जैसे कि हम मेरे अनुभव के अनुसार एक उदाहरण से समझते है 

एक बार एक ग्राहक को हमने माल देना चालू किया तो ग्राहक भी शुरुआत में अच्छे से पेमेंट करता था और हम भी उसे उसके ऑर्डर का सामान व्यवस्थित और समय पर पूरा देते थे ।  

दो तीन बार के लेन देन के बाद वो ग्राहक थोड़ा पेमेंट अभी और थोड़ा पेमेंट कुछ दिन बाद देने का कहने लगा हम ने भी सोचा कि रोज माल जा रहा है और थोड़ ही तो उधार देना है सोच कर माल उधार देना शुरू कर दिया फिर न जाने कब ये आदत कुछ समय से लेकर परमानेंट उधारी में बदल गई समय के साथ पता ही नहीं चला और उस ग्राहक का उधार जब हमने देखा तो 2 लाख के पास हो गया था 

फिर जब हमने हिसाब देखा तो पेमेंट की बात की तो ग्राहक हर हफ्ते दस दस हजार का पेमेंट करने लगा तो उस दो लाख के पेमेंट को पूरा करने में उसने लगभग 4-5 महीने लगा दिए 

जिसे कि रेगुलर कैश फ्लो भी कम होने लगा तो फिर हमने आगे उस ग्राहक की ऑर्डर लिस्ट में से उसे कम माल देना चालू किया ताकि पेमेंट ज्यादा आए और माल कम जाए फिर ऐसा करने से वह ग्राहक भी समझ गया कि बिना पेमेंट के सही समय पर माल नहीं मिल सकता तो फिर उसने ढंग से पेमेंट करना चालू कर दिया और फिर जाके कैश फेल सामान्य हो गया ।

Common Mistakes


हर किसी को उधार देना
limit fix ना करना
record maintain ना करना
late payment पर ध्यान ना देना
लेट पेमेंट करने पर भी ज्यादा उधारी देते जाना 
ग्राहकों की list न बनाना 
सही से दुकान के फाइनेंशियल डाटा को न देखना 
ये गलतियां धीरे-धीरे बड़ा नुकसान करती हैं।



Conclusion


किसी भी बिजनेस में सफल होने के लिए बिजनेस के रेगुलर स्टॉक और पेमेंट रोटेशन का सही से काम करना सबसे जरूरी होता है वैसे ही Hardware Shop में भी Credit System को सही तरीके से manage करना बहुत जरूरी है।

सही balance बनाकर ही आप profit और cash flow दोनों को control में रख सकते हैं।

सही customer को सही limit में उधार देना और time पर payment लेना ही long term success की key है।
हर लेट पेमेंट वाले ग्राहक को आप बात करके समझा सकते है

हमेशा कोशिश यही होनी चाहिए कि पेमेंट सिस्टम जितना फास्ट हो सके उतना फास्ट काम करे और आप को आगे भी उतना ही जल्दी पेमेंट करते रहना चाहिए ताकि आप को भी जल्दी पेमेंट का डिस्काउंट,अच्छी और फास्ट स्टॉक सर्विस मिल सके जिससे कि टाइम की बचत होती है और ग्राहक भी खुश समय पर माल मिलने के कारण तो सीधा सा बढ़िया प्रॉफिट और बढ़िया ग्रोथ ।

हम बॉस हार्डवेयर वेबसाइट में हार्डवेयर बिजनेस से जुड़ी ऐसी ही जानकारी और नालेज से भरी पोस्ट लाते रहते है जो इस बिजनेस से जुड़ी छोटी से छोटी हर जरूरी नॉलेज का खजाना होती है जैसे हम यहां आप को कुछ गाइड दे रहे है आप यह से सीधे इस पर क्लिक कर के गाइड पढ़ सकते है जो आप को बिजनेस में बेहतर बनने में हमेशा बहुत मदत करती है :-




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